कभी नक्सलवाद के खौफ में रहने वाले पूवर्ती गांव में मनी दिवाली, पुलिस के साथ ग्रामीणों ने मनाया दीपोत्सव

सुकमा। छत्तीसगढ़ के बस्तर में शांति और बदलाव की तस्वीर अब दूरस्थ गांवों में भी दिखाई देने लगी है। कभी नक्सलवाद के खौफ और बंदिशों के लिए पहचाने जाने वाले सुकमा जिले के पूवर्ती गांव में इस बार दीपावली का पर्व उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। सुकमा पुलिस ने ग्रामीणों के साथ दीपोत्सव आयोजित किया। इस दौरान गांव रोशनी से जगमगा उठा और बच्चों के चेहरों पर खुशियां नजर आईं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बस्तर दौरे और नक्सलमुक्त बस्तर के संकल्प के बीच पूवर्ती में आयोजित यह कार्यक्रम बदलते सामाजिक माहौल की तस्वीर पेश करता है। पुलिस और ग्रामीणों ने एक साथ दीपावली मनाकर शांति और विश्वास का संदेश दिया।

पुलिस की पहल से गांव में बना उत्सव का माहौल

सुकमा पुलिस की सामुदायिक पहल ‘निवा दुवड़ ते’ और ‘दिवाली आपके आंगन’ अभियान के तहत इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें ग्रामीणों, महिलाओं, बच्चों, आत्मसमर्पित नक्सलियों और सुरक्षा बलों के जवानों ने हिस्सा लिया।

पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज तिर्की के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में एसडीओपी जगरगुंडा प्रभात पटेल और थाना प्रभारी परशुराम पैकरा मौजूद रहे। डीआरजी के जवानों ने भी ग्रामीणों के साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं।

महिलाओं को साड़ी, पुरुषों को लुंगी और बच्चों को मिठाई

कार्यक्रम के दौरान पुलिस की ओर से महिलाओं को साड़ियां और पुरुषों को पारंपरिक लुंगी भेंट की गई। बच्चों को मिठाई के पैकेट बांटे गए। उनके मनोरंजन के लिए मिकी माउस झूले की व्यवस्था भी की गई।

शाम होते ही गांव के मुख्य चौराहे पर आतिशबाजी हुई। पटाखों की आवाज और दीपों की रोशनी से पूरा गांव उत्सव में डूब गया। बच्चों ने झूले का आनंद लिया और ग्रामीणों ने एक-दूसरे के साथ त्योहार की खुशियां बांटीं।

खौफ की जगह विश्वास, बंदिशों की जगह उत्सव

कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें सुरक्षा, शांति तथा विकास के लिए प्रशासन की प्रतिबद्धता का भरोसा दिलाया। ग्रामीणों ने भी पुलिस की इस पहल की सराहना की।

कभी नक्सली प्रभाव और सुरक्षा चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले पूवर्ती में ग्रामीणों और सुरक्षा बलों का एक साथ दिवाली मनाना बदलाव का संकेत है। इस आयोजन ने दिखाया कि बस्तर के दूरस्थ इलाकों में शांति के साथ सामाजिक विश्वास और सामान्य जनजीवन को मजबूत करने की कोशिशें भी जारी हैं।

इस बार पूवर्ती में सिर्फ घरों के आंगन ही रोशन नहीं हुए, बल्कि बच्चों की मुस्कान और ग्रामीणों के उत्साह ने भी नई उम्मीद जगाई।