भोपाल: मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का विस्तार करने के लिए सरकार ने मोबिलिटी विजन 2030 के तहत कई लक्ष्य तय किए हैं। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के जरिए शहरी, ग्रामीण और अंतरराज्यीय बस नेटवर्क को मजबूत बनाने की योजना है। इसके तहत वर्ष 2030 तक प्रदेश में 15 हजार से अधिक सार्वजनिक बसें चलाने और 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक बस सेवा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना में डिजिटल टिकटिंग, बसों की लाइव लोकेशन, सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और मोबाइल ऐप जैसी सुविधाओं को शामिल किया जा रहा है। सरकार निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी से परिवहन सेवाओं का विस्तार करना चाहती है।
मोबिलिटी विजन 2030 में क्या हैं लक्ष्य?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर शुरू की गई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के क्रियान्वयन और विस्तार की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) संभाल रहा है।
मोबिलिटी विजन 2030 के तहत प्रमुख लक्ष्य इस प्रकार हैं:
- 15 हजार से अधिक सार्वजनिक बसों का संचालन।
- 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक बस सेवा की पहुंच।
- पांच करोड़ से अधिक डिजिटल टिकट जारी करना।
- प्रतिदिन 30 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा देना।
- 80 से अधिक बस डिपो और टर्मिनल विकसित करना।
- इलेक्ट्रिक बसों से हर साल 70 हजार टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाना।
इन लक्ष्यों के लिए आधुनिक बस डिपो, टर्मिनल, अंतरराज्यीय बस अड्डे और अलग-अलग परिवहन साधनों को जोड़ने वाले केंद्र विकसित करने की योजना है।
निजी बस ऑपरेटरों की होगी भागीदारी
योजना के तहत निजी बस ऑपरेटरों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के जरिए जोड़ा जाएगा। ऑपरेटरों के चयन के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और अनुबंध आधारित व्यवस्था अपनाने की तैयारी है।
बसों के संचालन, निर्धारित फेरों और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी के लिए सेवा स्तर समझौते और प्रदर्शन के मानक तय किए जाएंगे। बसों के रखरखाव, चार्जिंग और संचालन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ चालकों और परिचालकों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा।
डिजिटल टिकटिंग से होगी बसों की निगरानी
परिवहन व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने के लिए इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) विकसित किया जा रहा है। इसके जरिए बस संचालन, टिकटिंग और यात्री सुरक्षा से जुड़ी जानकारियों को एकीकृत करने की योजना है।
इस व्यवस्था में कई सुविधाएं शामिल होंगी:
- लाइव लोकेशन: बस किस मार्ग पर और कहां चल रही है, इसकी जानकारी मिल सकेगी।
- डिजिटल टिकटिंग: टिकट बिक्री और किराया संग्रह का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखा जाएगा।
- CCTV और पैनिक बटन: यात्रियों की सुरक्षा और आपात स्थिति में सहायता की व्यवस्था मजबूत होगी।
- मोबाइल ऐप: यात्री बसों की जानकारी, टिकट और पास प्राप्त कर सकेंगे।
- कमांड-कंट्रोल सेंटर: बसों के संचालन और सेवाओं की निगरानी एक जगह से होगी।
- AI आधारित रूट प्लानिंग: यात्रियों की मांग के आधार पर मार्ग और बसों की उपलब्धता तय करने में मदद मिलेगी।
बस ऑपरेटरों की आय बढ़ाने पर भी जोर
योजना में बस ऑपरेटरों के संचालन और आय को भी ध्यान में रखा गया है। टिकट बिक्री में पारदर्शिता के लिए ई-टिकटिंग और वीडियो ऑडिट को बढ़ावा देने की तैयारी है।
इसके अलावा यात्रियों की मांग के आधार पर बसों के फेरे और मार्ग तय किए जाएंगे। टिकट से होने वाली आय के साथ कार्गो सेवाओं और विज्ञापनों के जरिए भी ऑपरेटरों क