नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 200 के पार पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। इसके तहत धूल, कचरा जलाने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
GRAP के नियमों में क्या बदला?
सीएक्यूएम के संशोधित शेड्यूल के मुताबिक, कुछ पाबंदियों को पहले चरण में ही शामिल किया गया है। डीजल जनरेटर सेट के अनियंत्रित इस्तेमाल और एनसीआर तथा पड़ोसी राज्यों से बीएस-4 या उससे पुराने मानक की बसों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक जैसे उपाय अब GRAP-1 के तहत लागू किए गए हैं।
इसका उद्देश्य प्रदूषण को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करना है, ताकि हवा की गुणवत्ता और खराब होने से रोकी जा सके।
वाहनों और निर्माण कार्यों पर पाबंदियां
GRAP-1 के तहत खुले में कचरा, सूखी पत्तियां, प्लास्टिक और बायोमास जलाने पर रोक है। निर्माण और विध्वंस स्थलों पर धूल नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन और निर्धारित मानकों का पालन जरूरी है।
प्रशासन पुराने वाहनों और वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना चलने वाले वाहनों पर भी निगरानी रख रहा है। हालांकि, पुराने वाहनों पर लागू नियमों और प्रतिबंधों की स्थिति वाहन के प्रकार तथा संबंधित आदेशों पर निर्भर करती है।
चार चरणों में बढ़ेगी सख्ती
GRAP के तहत AQI के स्तर के अनुसार अलग-अलग चरण लागू होते हैं:
- स्टेज-1: AQI 201 से 300 — खराब
- स्टेज-2: AQI 301 से 400 — बेहद खराब
- स्टेज-3: AQI 401 से 450 — गंभीर
- स्टेज-4: AQI 450 से अधिक — गंभीर से भी अधिक
संशोधित व्यवस्था में आगे के चरणों में कुछ वाहनों पर प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने और मालवाहक वाहनों को मिलने वाली छूट सीमित करने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करें, सार्वजनिक परिवहन अपनाएं और ट्रैफिक सिग्नल पर अनावश्यक रूप से इंजन चालू न रखें। प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की सूचना संबंधित सरकारी माध्यमों से देने की भी सलाह दी गई है।