छत्तीसगढ़ में 12,489 शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन रद्द, आरक्षण रोस्टर पर हाईकोर्ट का फैसला

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 12,489 शिक्षकों की भर्ती से जुड़े विज्ञापन को आरक्षण रोस्टर के विवाद में रद्द कर दिया है। जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल की गई आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया।

विवाद स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 4 मई 2023 को जारी भर्ती विज्ञापन में आरक्षण लागू करने के तरीके को लेकर था। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि भर्ती में ऐसी आरक्षण नीति के आधार पर रोस्टर अपनाया गया, जिसे हाईकोर्ट पहले ही निरस्त कर चुका था।

58 फीसदी आरक्षण व्यवस्था पर विवाद

याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, 29 नवंबर 2012 की अधिसूचना के जरिए राज्य में कुल आरक्षण बढ़ाकर 58 फीसदी किया गया था। हाईकोर्ट ने 19 सितंबर 2022 को इस व्यवस्था को असंवैधानिक मानते हुए निरस्त कर दिया था। इसके बाद भी इसी नीति से जुड़े रोस्टर के आधार पर भर्ती विज्ञापन जारी किए जाने को अदालत में चुनौती दी गई।

फैसले में अदालत ने विवादित आरक्षण व्यवस्था को निरस्त किया। हालांकि, पहले से नियुक्त शिक्षकों को तत्काल सेवा से हटाने का निर्देश नहीं दिया गया।

इस फैसले का भर्ती प्रक्रिया पर आगे क्या असर होगा, यह संबंधित विभाग की कार्रवाई और आदेश के विस्तृत प्रभाव पर निर्भर करेगा।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 12,489 शिक्षकों की भर्ती से जुड़े विज्ञापन को आरक्षण रोस्टर के विवाद में रद्द कर दिया है। जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल की गई आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया।

विवाद स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 4 मई 2023 को जारी भर्ती विज्ञापन में आरक्षण लागू करने के तरीके को लेकर था। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि भर्ती में ऐसी आरक्षण नीति के आधार पर रोस्टर अपनाया गया, जिसे हाईकोर्ट पहले ही निरस्त कर चुका था।

58 फीसदी आरक्षण व्यवस्था पर विवाद

याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, 29 नवंबर 2012 की अधिसूचना के जरिए राज्य में कुल आरक्षण बढ़ाकर 58 फीसदी किया गया था। हाईकोर्ट ने 19 सितंबर 2022 को इस व्यवस्था को असंवैधानिक मानते हुए निरस्त कर दिया था। इसके बाद भी इसी नीति से जुड़े रोस्टर के आधार पर भर्ती विज्ञापन जारी किए जाने को अदालत में चुनौती दी गई।

फैसले में अदालत ने विवादित आरक्षण व्यवस्था को निरस्त किया। हालांकि, पहले से नियुक्त शिक्षकों को तत्काल सेवा से हटाने का निर्देश नहीं दिया गया।

इस फैसले का भर्ती प्रक्रिया पर आगे क्या असर होगा, यह संबंधित विभाग की कार्रवाई और आदेश के विस्तृत प्रभाव पर निर्भर करेगा।