भोपाल: मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए 71 स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण और उन्नयन कार्यों में तेजी लाई जाएगी। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने अधिकारियों को टेंडर प्रक्रिया जल्द पूरी करने और परियोजनाओं को तय समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने एम्बुलेंस सेवाओं की निगरानी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और मेडिकल कॉलेजों में कैंसर उपचार की सुविधाएं बढ़ाने पर भी जोर दिया।
29 नए संस्थान बनेंगे, 42 का उन्नयन
मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 71 स्वीकृत संस्थानों में 29 नए संस्थान शामिल हैं। इनके लिए प्रशासनिक स्वीकृति जारी हो चुकी है।
इसके अलावा 42 मौजूदा स्वास्थ्य संस्थानों का उन्नयन किया जाएगा। इनमें से 22 संस्थानों का काम परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) और 20 का काम मध्य प्रदेश बिल्डिंग डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को सौंपा गया है।
उप मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने और अनावश्यक देरी होने पर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।
एम्बुलेंस सेवाओं और डॉक्टरों की नियुक्ति पर जोर
बैठक में एम्बुलेंस सेवाओं की समीक्षा और मरीजों तक समय पर सहायता पहुंचाने के लिए निगरानी बढ़ाने पर चर्चा हुई। अस्पतालों में प्रबंधकों की पदस्थापना की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश भी दिए गए।
चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए रिक्त पदों को भरने के लिए जरूरी कार्रवाई तेज करने को कहा गया।
पांच मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी कैंसर उपचार सुविधाएं
प्रदेश के पांच पुराने मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल ऑन्कोलॉजी और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभागों को मजबूत करने तथा आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही डायलिसिस सेवाओं के संचालन के लिए नए टेंडर की प्रक्रिया की समीक्षा की गई।
जिला अस्पतालों में नए पदों के प्रस्ताव
बैठक में जिला अस्पतालों में नए पद सृजित करने, सीसीएचबी के तहत करीब 4,000 पदों की स्वीकृति और सुषेण योजना के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। रीवा, ग्वालियर और जबलपुर मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन के विषय भी समीक्षा में शामिल रहे।
इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय संबंधित स्वीकृति प्रक्रिया के बाद होगा। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को आपसी समन्वय से काम करने और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों में अनावश्यक देरी रोकने के निर्देश दिए।