बिहान योजना में प्रशासनिक फेरबदल, क्षेत्रीय समन्वयक और पीआरपी के कार्यक्षेत्र बदले

सारंगढ़-बिलाईगढ़: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में क्षेत्रीय समन्वयक और प्रोफेशनल रिसोर्स पर्सन (पीआरपी) के कार्यक्षेत्रों में बदलाव किया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ऋषिकेश तिवारी ने यह प्रशासनिक फेरबदल किया है। जिले के कुछ क्लस्टरों में शिकायतें सामने आने के बीच इस बदलाव के बाद योजना के संचालन, निगरानी और जवाबदेही को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

पांच कर्मचारियों के बदले गए कार्यक्षेत्र

प्रशासनिक बदलाव के तहत अलग-अलग क्लस्टरों में जिम्मेदारियां पुनर्निर्धारित की गई हैं। इसके अनुसार:

  • सुनील सिदार: बरमकेला से बिलाईगढ़ जनपद पंचायत की जिम्मेदारी।
  • आशा साहू: पवनी से कांदुरपाली क्लस्टर।
  • धनेश्वरी जांगड़े: कांदुरपाली से बुदेली क्लस्टर।
  • चमेली जांगड़े: बुदेली से पेंड्रावन क्लस्टर।
  • चंद्रिका वैष्णव: पेंड्रावन से पवनी क्लस्टर।

इस फेरबदल के बाद संबंधित क्षेत्रों में योजना के क्रियान्वयन और समूहों से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी की जिम्मेदारी नए सिरे से तय हुई है।

ग्रामीण महिला समूहों के हितों पर जोर

बिहान योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के तहत समूहों को बचत, वित्तीय सहायता और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाता है।

ऐसे में समूहों को मिलने वाली राशि का पारदर्शी उपयोग, भुगतान में समयबद्धता और शिकायतों का उचित निराकरण महत्वपूर्ण है। क्लस्टरों में शिकायतों की स्थिति को देखते हुए यह जरूरी होगा कि प्रशासनिक बदलाव के साथ निगरानी व्यवस्था भी प्रभावी बनाई जाए।

केवल कार्यक्षेत्र बदलने से होगा सुधार?

कार्यक्षेत्रों में बदलाव से कर्मचारियों की जिम्मेदारियां बदली हैं, लेकिन व्यवस्था में स्थायी सुधार के लिए नियमित समीक्षा और जवाबदेही भी जरूरी है। समूहों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई, वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता और योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी से ग्रामीण महिलाओं का भरोसा मजबूत किया जा सकता है।

हालांकि, किसी भी वित्तीय अनियमितता या राशि के दुरुपयोग की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। यदि इस संबंध में शिकायतें हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अब शिकायतों के निराकरण पर नजर

प्रशासनिक फेरबदल के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित क्लस्टरों में कामकाज कितना बेहतर होता है और स्व-सहायता समूहों की समस्याओं का समाधान किस गति से किया जाता है। नियमित निगरानी, पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही इस योजना को प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।