ब्लू मून और माइक्रोमून का दुर्लभ संयोग: 31 मई को दिखेगा अनोखा चंद्र नजारा

 नई दिल्ली। 31 मई को खगोल प्रेमियों के लिए एक विशेष अवसर है। आज आसमान में ब्लू मून और माइक्रोमून का दुर्लभ संयोग देखने को मिलेगा। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी पर रहेगा, जिसके कारण उसका आकार सामान्य पूर्णिमा की तुलना में थोड़ा छोटा और चमक भी कम दिखाई देगी।यह घटना खगोल विज्ञान की दृष्टि से बेहद रोचक मानी जाती है और इसे बिना किसी दूरबीन के भी देखा जा सकता है।

क्या होता है ब्लू मून?

ब्लू मून का संबंध चंद्रमा के रंग से नहीं बल्कि कैलेंडर से होता है। जब किसी एक अंग्रेजी महीने में दो पूर्णिमा पड़ती हैं, तो दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जाता है।मई महीने में पहली पूर्णिमा 1 मई को हुई थी, जबकि दूसरी पूर्णिमा 31 मई को पड़ रही है। इसी वजह से आज की पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जा रहा है।

पृथ्वी से सबसे दूर होगा चंद्रमा

आज चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 4 लाख 6 हजार किलोमीटर की दूरी पर रहेगा। इस स्थिति को खगोल विज्ञान में ‘एपोजी’ कहा जाता है।चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा पूर्णतः गोलाकार नहीं बल्कि अंडाकार कक्षा में करता है। इसी कारण कभी वह पृथ्वी के निकट आता है और कभी अधिक दूर चला जाता है। जब वह अपनी कक्षा में सबसे दूर पहुंचता है, तब एपोजी की स्थिति बनती है।

माइक्रोमून क्यों कहा जाता है?

एपोजी की स्थिति में होने के कारण आज चंद्रमा सामान्य पूर्णिमा की तुलना में लगभग 5 से 7 प्रतिशत छोटा दिखाई देगा। इसके अलावा उसकी चमक भी करीब 10 प्रतिशत तक कम महसूस हो सकती है।इसी वजह से इस पूर्णिमा को माइक्रोमून कहा जाता है। हालांकि आकार में यह अंतर बहुत अधिक नहीं होता, लेकिन ध्यान से देखने पर इसका प्रभाव महसूस किया जा सकता है।

एंटारेस तारे के करीब रहेगा चंद्रमा

खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार आज चंद्रमा वृश्चिक तारामंडल के सबसे चमकीले लाल तारे Antares के निकट भी दिखाई देगा। इससे यह खगोलीय दृश्य और अधिक आकर्षक बन जाएगा।

कब और कैसे देखें यह नजारा?

भारत में पूर्णिमा की यह खगोलीय घटना दिन के समय अपने चरम पर होगी, लेकिन चंद्रमा को रात के समय आसानी से देखा जा सकेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार 31 मई को चंद्रोदय शाम 7 बजकर 36 मिनट पर होगा।खुले आसमान और कम प्रकाश प्रदूषण वाले स्थानों से इस दुर्लभ दृश्य का बेहतर अवलोकन किया जा सकता है।

खगोल प्रेमियों के लिए खास अवसर

ब्लू मून और माइक्रोमून का एक साथ होना अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है। इसलिए खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक यादगार अवसर है। बिना किसी विशेष उपकरण के भी इस प्राकृतिक खगोलीय घटना का आनंद लिया जा सकता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पूर्णिमा और चंद्रमा की विशेष स्थितियों का विभिन्न राशियों पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि इसका वैज्ञानिक आधार अलग विषय है, लेकिन ज्योतिष में इस तरह की घटनाओं को विशेष महत्व दिया जाता है।