बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दया याचिका से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को प्राप्त क्षमादान की शक्ति स्वतंत्र संवैधानिक अधिकार है। यदि राज्यपाल किसी कैदी की दया याचिका एक बार खारिज कर देते हैं, तो मौजूदा जेल नियमों के तहत उसी आवेदन पर दोबारा पुनर्विचार का प्रावधान नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि कार्यपालिका के ऐसे निर्णयों में न्यायालय तभी हस्तक्षेप कर सकता है, जब फैसला पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण या मनमाना हो।मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने हत्या के दोषी नीरज माली उर्फ गोलू की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।