मुंगेली नाबालिग हत्याकांड में नया मोड़, अपर सत्र न्यायालय ने रद्द की आरोपियों की जमानत

मुंगेली: छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के नेवासपुर गांव में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की की हत्या के मामले में न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है। आरोपियों को जमानत देने के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय के आदेश को अपर सत्र न्यायालय ने निरस्त कर दिया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदालत ने आरोपियों की रिमांड भी स्वीकार की है।

पुलिस ने जमानत आदेश को दी थी चुनौती

इस मामले में गिरफ्तारी के बाद CJM न्यायालय से आरोपियों को जमानत मिल गई थी। गिरफ्तारी की प्रक्रिया और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के पालन को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद मुंगेली पुलिस ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए अपर सत्र न्यायालय का रुख किया।

सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायालय ने CJM का आदेश निरस्त कर दिया और आरोपियों की जमानत रद्द कर दी। इस फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर उठे थे सवाल

मामले में BNSS की धारा 35(3), 47 और 48 के अनुपालन को लेकर आपत्तियां उठाए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें गिरफ्तारी से पहले नोटिस देने, आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की सूचना देने और संबंधित प्रक्रिया के दस्तावेजी रिकॉर्ड जैसे पहलू शामिल हैं।

बताया गया था कि गिरफ्तारी और विवेचना से जुड़े दस्तावेजों में कथित कमियों के आधार पर CJM न्यायालय ने आरोपियों को जमानत दी थी। हालांकि, इन प्रक्रियात्मक सवालों और अपर सत्र न्यायालय के आदेश के विस्तृत कानूनी आधार की पुष्टि लिखित न्यायालयीन आदेश से ही हो सकेगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी दिया गया हवाला

इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2026 के एक आदेश का हवाला दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, संबंधित फैसले का नाम, प्रकरण क्रमांक और उसमें निर्धारित कानूनी सिद्धांत का विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए अपर सत्र न्यायालय ने उस फैसले को किस आधार पर लागू किया, इसकी पुष्टि लिखित आदेश के अध्ययन के बाद ही की जा सकती है।

विवेचना और विभागीय कार्रवाई पर भी सवाल

मामले की विवेचना प्रशिक्षु उपनिरीक्षक नवीन कुमार द्वारा किए जाने की जानकारी दी गई थी। गिरफ्तारी की प्रक्रिया और दस्तावेजों में कथित कमियों के बाद विवेचना अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठे। संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पत्राचार किए जाने की बात कही गई है, लेकिन विभागीय कार्रवाई की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

अपर सत्र न्यायालय के आदेश के बाद अब आरोपियों की अभिरक्षा और आगे की कानूनी कार्रवाई पर ध्यान रहेगा। मामले के विस्तृत न्यायिक आधार और आदेश के क्रियान्वयन की स्थिति आधिकारिक दस्तावेजों से स्पष्ट होगी।