बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दो मासूम भाई-बहनों की सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्वास से जुड़े एक संवेदनशील मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि बच्चों को किसी भी परिस्थिति में उनकी सौतेली बहन या उसके पति की कस्टडी नहीं सौंपी जाएगी। अदालत ने दोनों को बच्चों से मिलने पर भी स्थायी रोक लगा दी है।हालांकि अदालत ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि बच्चे किसी अवैध हिरासत में नहीं, बल्कि बाल कल्याण समिति की देखरेख में सुरक्षित हैं। इसके बावजूद कोर्ट ने बच्चों के भविष्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास की निगरानी जारी रखने का निर्णय लिया है।