सीएम हेल्पलाइन में फर्जी शिकायतों का खेल! 21 मोबाइल नंबरों से दर्ज हुईं 233 शिकायतें, मऊगंज पुलिस पर गंभीर सवाल

Mauganj :  सीएम हेल्पलाइन 181 को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जिस व्यवस्था को आम लोगों की समस्याओं के समाधान का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है, उसी में कथित फर्जी शिकायतों का खेल उजागर होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

कार्रवाई के बाद आरक्षक लाइन अटैच, लेकिन सवाल अब भी बाकी
मामले के सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने आरक्षक विवेक यादव को लाइन अटैच कर दिया है। हालांकि पूरे घटनाक्रम के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या केवल एक कर्मचारी पर कार्रवाई कर मामले को सीमित करने की कोशिश की जा रही है, जबकि शिकायतों के निराकरण की जिम्मेदारी रखने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

21 मोबाइल नंबर और 233 शिकायतें, जांच में सामने आया चौंकाने वाला दावा
आरोप है कि कुछ कर्मचारियों ने मिलकर महज 21 मोबाइल नंबरों का उपयोग करते हुए 233 शिकायतें दर्ज कराईं। दावा किया जा रहा है कि इन शिकायतों के जरिए रिकॉर्ड में बेहतर प्रदर्शन दिखाने का प्रयास किया गया।

मामले में आरक्षक विवेक यादव, डायल 112 से जुड़े कुछ कर्मचारियों और एक निजी वाहन चालक का नाम भी चर्चा में आया है। आरोपों की जांच जारी है।

चार मिनट में पांच शिकायतें, आंकड़ों ने बढ़ाई शंका
मामले में जिन तथ्यों की चर्चा हो रही है, उनमें बेहद कम समय में लगातार कई शिकायतों का दर्ज होना भी शामिल है। कुछ शिकायतें एक-दो मिनट के अंतराल में दर्ज हुईं, जिससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह गहरा गया और जांच की मांग तेज हो गई।

एक शिकायत ने खोली कथित फर्जीवाड़े की परतें
जांच के दौरान एक ऐसे व्यक्ति के नाम से शिकायत दर्ज होने का दावा सामने आया, जिसकी कथित कहानी और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर पाया गया। इसके बाद पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई तथा शिकायतों की सत्यता पर सवाल उठने लगे।

थाना स्तर की जवाबदेही पर उठ रहे सवाल
पूरा मामला सामने आने के बाद थाना स्तर पर निगरानी और जवाबदेही को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। नियमों के अनुसार शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि आरोप सही हैं, तो पूरी प्रक्रिया के दौरान निगरानी व्यवस्था कैसे काम कर रही थी।

जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों तथा शिकायत रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस पूरे प्रकरण में किस-किस की जिम्मेदारी तय होती है।