जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में फर्जी भारतीय स्टेट बैंक शाखा संचालित कर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इस बहुचर्चित मामले में पुलिस ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है।
मामला ग्राम छपोरा का है, जहां भारतीय स्टेट बैंक के नाम पर कथित तौर पर फर्जी शाखा संचालित कर युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा दिया जा रहा था। आरोपियों ने कैशियर सहित विभिन्न पदों पर नियुक्ति का लालच देकर कई लोगों से बड़ी रकम वसूली थी।
नौकरी के नाम पर वसूले 7.71 लाख रुपये
पुलिस जांच के अनुसार आरोपियों ने छह बेरोजगार युवाओं को बैंक में नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया था। इसके बदले उनसे कुल 7 लाख 71 हजार 800 रुपये लिए गए। भरोसा बढ़ाने के लिए युवाओं को फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिए गए, जिससे उन्हें किसी तरह का संदेह न हो।
SBI क्षेत्रीय कार्यालय की शिकायत से खुला मामला
मामले का खुलासा तब हुआ जब भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय कोरबा के प्रतिनिधि जीवराखन कावड़े ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि कुछ लोग ग्राम छपोरा में बैंक के नाम पर फर्जी गतिविधियां चला रहे हैं और लोगों को नौकरी का झांसा देकर रकम वसूल रहे हैं।
शिकायत मिलने के बाद मालखरौदा थाना पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।
सुनियोजित तरीके से चल रहा था ठगी का नेटवर्क
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह कोई साधारण ठगी नहीं बल्कि संगठित और सुनियोजित नेटवर्क था, जिसमें कई लोग शामिल थे। आरोपियों ने बैंक जैसी व्यवस्था तैयार कर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की थी।
इस मामले में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें अनिल भास्कर, नरेंद्र साहू, हीरा दिवाकर उर्फ कुणाल दिवाकर, टुकेश्वर दास महंत, सुभद्रा महंत और पंकज टंडन सहित अन्य नाम शामिल हैं।
फरार आरोपियों की तलाश में जुटी थी पुलिस
पुलिस टीम लगातार फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी। इसी दौरान मिले इनपुट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर 13 जून को तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में 32 वर्षीय मंथिर दास, 35 वर्षीय रेखा साहू और 26 वर्षीय मिलन साहू शामिल हैं।
पूछताछ में कबूला अपराध
पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान तीनों आरोपियों ने मामले में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली। इसके बाद उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
गिरोह के खिलाफ आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फर्जी बैंक शाखा, फर्जी नियुक्ति पत्र और नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है। मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है और आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
बेरोजगार युवाओं के लिए चेतावनी
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी से बचने के लिए युवाओं को सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी नियुक्ति प्रक्रिया में आवेदन करने से पहले संबंधित संस्था और दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि करना बेहद आवश्यक है।