बैंक की मनमानी पर आयोग का सख्त एक्शन…ग्राहक के खाते से काटी रकम लौटाने का आदेश, 87 हजार से ज्यादा वापस देने का फैसला

 बलौदाबाजार : बैंकिंग सेवा में लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है, जहां जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक्सिस बैंक को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए ग्राहक के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने बैंक को न सिर्फ शेष राशि लौटाने का आदेश दिया है, बल्कि मानसिक क्षति और वाद-व्यय के भुगतान का भी निर्देश दिया है।

ओवरड्राफ्ट खाते में गड़बड़ी से शुरू हुआ पूरा मामला

भाटापारा निवासी बृजमोहन आनंद ने एक्सिस बैंक, भाटापारा शाखा में ओवरड्राफ्ट खाता खुलवाया था, जो 5 वर्षों की अवधि के लिए संचालित किया गया। शिकायत के अनुसार, बाद में बैंक ने खाते का नवीनीकरण करने के बजाय उसे लॉक कर दिया और खाते से भारी-भरकम राशि की कटौती कर दी।

लाखों की कटौती और खाते पर रोक से बढ़ी परेशानी

जानकारी के अनुसार बैंक ने खाते से अलग-अलग मदों में बड़ी राशि काट ली, जिसमें कंडोलेटेड चार्ज, एक्स्ट्रा चार्ज और ब्याज संबंधी कटौतियां शामिल थीं। शिकायत में यह भी बताया गया कि कुल मिलाकर खाते से कई लाख रुपये की कटौती की गई, जबकि ग्राहक को पूरी जानकारी नहीं दी गई।

बाद में बैंक ने करीब 99 हजार रुपये वापस खाते में जमा किए, लेकिन शेष राशि को लेकर विवाद जारी रहा। इसी दौरान ग्राहक का सिबिल स्कोर भी प्रभावित हुआ, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई।

आयोग में पहुंचा मामला, बैंक नहीं दे सका जवाब

पीड़ित ने मामले की शिकायत जिला उपभोक्ता आयोग में की। सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने दस्तावेजों और रिकॉर्ड की गहन जांच की। आयोग ने पाया कि बैंक की ओर से लगाए गए आरोपों का कोई ठोस खंडन प्रस्तुत नहीं किया गया।

इसके अलावा यह भी सामने आया कि आयोग द्वारा भेजे गए नोटिस का बैंक ने जवाब देने से भी परहेज किया, जिससे मामला और मजबूत हो गया।

बैंक को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए बड़ा आदेश

सभी तथ्यों की जांच के बाद आयोग ने एक्सिस बैंक को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए आदेश जारी किया। बैंक को निर्देश दिया गया है कि वह 87,536 रुपये की शेष राशि ग्राहक को लौटाए। इसके साथ ही इस राशि पर कटौती की तारीख से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

मानसिक क्षति और वाद-व्यय का भी भुगतान

आयोग ने बैंक को मानसिक और शारीरिक क्षतिपूर्ति के रूप में 15 हजार रुपये तथा वाद-व्यय के रूप में 7 हजार रुपये भी देने का आदेश दिया है। यह पूरी राशि आदेश जारी होने के 45 दिनों के भीतर भुगतान करनी होगी।

ग्राहकों के अधिकारों पर मजबूत संदेश

इस फैसले को बैंकिंग क्षेत्र में ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा के रूप में देखा जा रहा है। आयोग का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि किसी भी तरह की अनियमितता या मनमानी पर कार्रवाई तय है और ग्राहक को न्याय मिल सकता है।