भ्रष्टाचार पर सख्त प्रहार: एसीबी मामले में सेवानिवृत्त बाबू को जेल और जुर्माना

 अंबिकापुर : स्थित विशेष न्यायालय ने भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में अहम निर्णय सुनाते हुए जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त सहायक ग्रेड 03 व्ही के सिन्हा को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें तीन वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गुरुवार को घोषित किया गया।

पेंशन और ग्रेच्युटी के नाम पर रिश्वत का आरोप

मामला ग्राम कटकोना के निवासी लोचन सिंह की शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायत के अनुसार उनके पिता लरघुराम जल संसाधन विभाग में चौकीदार पद से 30 नवंबर 2015 को सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद केवल बचत निधि की राशि जारी की गई, जबकि पेंशन और ग्रेच्युटी का भुगतान लंबित रह गया।आरोप के मुताबिक विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड 03 व्ही के सिन्हा ने लंबित प्रकरण को आगे बढ़ाने और निपटाने के बदले पहले 3 हजार रुपये लिए और बाद में 8 हजार रुपये की अतिरिक्त मांग रखी।

एसीबी की योजना और रंगे हाथों गिरफ्तारी

शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने मामले का सत्यापन किया और ट्रैप कार्रवाई की तैयारी की। जांच के दौरान रिश्वत की राशि 7 हजार रुपये तय हुई।13 अगस्त 2020 को एसीबी की टीम ने सुनियोजित कार्रवाई करते हुए व्ही के सिन्हा को जल संसाधन विभाग कार्यालय के बाहर मुख्य सड़क पर शिकायतकर्ता से 7 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

न्यायिक प्रक्रिया और सजा का ऐलान

जांच पूरी होने के बाद 22 जून 2021 को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अंबिकापुर में आरोपी के खिलाफ अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना और सजा सुनाई।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश

इस निर्णय को भ्रष्टाचार के मामलों में एक सख्त उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। एसीबी की कार्रवाई और अदालत के फैसले ने यह संदेश दिया है कि सरकारी तंत्र में रिश्वतखोरी को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।