रायपुर : आयोजित मुख्यमंत्री किसान संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशभर से आए किसानों के साथ सीधा संवाद कर खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि को अधिक लाभकारी, आधुनिक और टिकाऊ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नई तकनीकों, नवाचारों और किसान हितैषी योजनाओं के जरिए खेती को नई दिशा देने का काम किया जा रहा है।
किसान परिवार से जुड़ाव ने समझाया खेती का संघर्ष
मुख्यमंत्री ने किसानों से बातचीत के दौरान अपने जीवन के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि किसान परिवार से होने के कारण उन्हें बचपन से ही खेती और ग्रामीण जीवन की चुनौतियों को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला। कम उम्र में परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के दौरान उन्होंने खेती से जुड़ी कठिनाइयों का अनुभव किया, इसलिए किसानों की समस्याओं और जरूरतों को वे बेहतर ढंग से समझते हैं।उन्होंने कहा कि पहले खेती पूरी तरह मौसम और बारिश पर निर्भर रहती थी, लेकिन आज कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलावों ने नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। आधुनिक मशीनों और वैज्ञानिक तरीकों से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सरकारी योजनाएं बदल रही किसानों की तस्वीर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, बिना ब्याज कृषि ऋण, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, उन्नत बीजों की उपलब्धता और कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं से किसानों को मजबूत आर्थिक आधार मिला है।उन्होंने बताया कि सुशासन तिहार के दौरान गांव-गांव पहुंचकर किसानों से सीधे संवाद करने पर यह महसूस हुआ कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है। किसानों के बढ़ते आत्मविश्वास को उन्होंने योजनाओं की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बताया।
ड्रोन तकनीक से बदल रही खेती की तस्वीर
कार्यक्रम में शामिल ड्रोन दीदियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव में ड्रोन का उपयोग समय और लागत दोनों की बचत करता है। इससे खेती अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बन रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रोन तकनीक केवल खेती को आधुनिक नहीं बना रही, बल्कि महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार कर रही है।
जैविक खेती को बताया भविष्य की जरूरत
मुख्यमंत्री ने किसानों से प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और जैविक खेती जैसी तकनीकें खेती की लागत कम करने के साथ उत्पादन बढ़ाने में भी मददगार साबित हो रही हैं।उन्होंने कहा कि इन उपायों से मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है, पर्यावरण सुरक्षित रहता है और कृषि लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहती है। किसानों को रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने की सलाह भी दी गई।
खाद और बीज की कमी को लेकर न हों चिंतित
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आगामी खरीफ सीजन के लिए खाद और बीज की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उन्होंने किसानों से किसी भी तरह की अफवाहों पर भरोसा नहीं करने की अपील की।उन्होंने कहा कि सरकार कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त नजर रख रही है तथा जरूरत के अनुसार किसानों तक उर्वरकों और बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
फलों और वैकल्पिक खेती से बढ़ रही आमदनी
कार्यक्रम में कई प्रगतिशील किसानों ने अमरूद, ड्रैगन फ्रूट, मौसंबी, पपीता और आम जैसी फसलों की उन्नत खेती के अनुभव साझा किए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी तरीका बनकर उभरा है।
उन्होंने किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी, प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पादन और अन्य आधुनिक कृषि मॉडल अपनाने की सलाह दी।
युवा अब खेती को उद्यम के रूप में देख रहे हैं
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का युवा खेती को केवल परंपरागत पेशे के रूप में नहीं, बल्कि एक आधुनिक व्यवसाय और उद्यम के रूप में देख रहा है। यह बदलाव कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है।उन्होंने बताया कि राज्य सरकार कृषि आधारित कौशल विकास, कृषि उद्यमिता, ड्रोन संचालन प्रशिक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है।
तकनीक अपनाने वाले किसान ही बनेंगे समृद्ध
अपने संबोधन के समापन में मुख्यमंत्री ने किसानों से नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल किया जा सकता है।मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच, तकनीकी नवाचार और आधुनिक संसाधनों का उपयोग ही किसानों की आर्थिक समृद्धि और ग्रामीण विकास की मजबूत नींव बनेगा।