MP में वोटर आईडी को लेकर नया विवाद: कांग्रेस प्रवक्ता को मिले दो नए कार्ड, एसआईआर प्रक्रिया पर उठे सवाल

 भोपाल। मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने दावा किया है कि चुनावी सत्यापन प्रक्रिया के बाद उनके नाम पर दो नए वोटर आईडी कार्ड जारी कर दिए गए हैं। इसे लेकर उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

अहिरवार का कहना है कि पहले उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। शिकायत और सुधार प्रक्रिया के बाद नाम तो जोड़ा गया, लेकिन इसके साथ ही दो अलग-अलग वोटर आईडी कार्ड जारी कर दिए गए।

सभी जानकारी समान, केवल नंबर अलग

कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार दोनों नए वोटर पहचान पत्रों में नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि और पता पूरी तरह एक समान है। अंतर केवल वोटर आईडी नंबर का है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब घर-घर जाकर सत्यापन किया गया, आधार जैसी पहचान संबंधी जानकारी की जांच हुई, तब एक ही व्यक्ति के लिए दो अलग-अलग वोटर पहचान पत्र कैसे जारी हो गए।

पुराना कार्ड भी वैध, तो कुल तीन पहचान पत्र?

मिथुन अहिरवार ने बताया कि उनके पास पहले से एक वोटर आईडी कार्ड मौजूद है, जिसे अधिकारियों ने वैध बताया था। अब सुधार प्रक्रिया के बाद दो और कार्ड जारी हो गए हैं।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि पुराना कार्ड भी मान्य है और दो नए कार्ड भी जारी हो चुके हैं, तो क्या एक व्यक्ति के पास तीन मतदाता पहचान पत्र होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।

एसआईआर प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल

कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि एक राजनीतिक दल के पदाधिकारी के मामले में इस तरह की त्रुटि हो सकती है, तो आम मतदाताओं के आंकड़ों की शुद्धता को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

उनका कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक संवेदनशील प्रक्रिया है और इसमें होने वाली छोटी गलती भी चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।

चुनाव आयोग से मांगा स्पष्टीकरण

मामले को गंभीर बताते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने चुनाव आयोग से स्पष्ट जवाब मांगा है। साथ ही उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच कराने और यह पता लगाने की मांग की है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर एक जैसी जानकारी के साथ अलग-अलग वोटर पहचान पत्र कैसे जारी हुए।

मामले पर बढ़ सकती है राजनीतिक बहस

वोटर आईडी और मतदाता सूची से जुड़ा यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है। विपक्ष पहले से ही मतदाता सूची और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाता रहा है। ऐसे में यह नया विवाद चुनावी तैयारियों के बीच राजनीतिक माहौल को और गर्मा सकता है।