सड़क पर जन्मदिन मनाने पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल…लगातार बढ़ती घटनाओं पर अदालत की तीखी टिप्पणी

बिलासपुर। प्रदेश में सड़कों पर जन्मदिन मनाने और सार्वजनिक जगहों को निजी उत्सव स्थल बनाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हाईकोर्ट ने इस प्रवृत्ति पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा है कि राज्य सरकार और पुलिस की निष्क्रियता अब गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अदालत ने यहां तक संकेत दिया कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो ऐसे मामलों में आदेशों के उल्लंघन का मुकदमा दर्ज करना पड़ेगा।

सड़क जाम कर केक काटने की घटनाओं पर पहले भी संज्ञान

प्रदेश में कई बार देखा गया है कि लग्जरी वाहनों का काफिला लगाकर या सड़क पर कार खड़ी कर जन्मदिन मनाया जाता है और केक काटकर यातायात बाधित किया जाता है। हाईकोर्ट ने फरवरी 2025 में रायपुर में एक मॉल संचालक के बेटे द्वारा सड़क जाम कर जन्मदिन मनाने के मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

इसके बावजूद ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लग सकी और लगातार नए मामले सामने आते रहे। अदालत ने कई बार राज्य सरकार को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

स्वास्थ्य मंत्री के पीए के परिवार के मामले पर भी जताई थी नाराजगी

कुछ महीने पहले एक मामले में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के पीए राजेंद्र दास की पत्नी द्वारा सड़क पर जन्मदिन मनाने पर भी अदालत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उस समय अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि जब मामला मंत्री स्तर से जुड़ा हो, तो जिम्मेदारी और बढ़ जाती है और तत्काल कार्रवाई अपेक्षित होती है।

मुख्य न्यायाधीश की सख्त टिप्पणी और चेतावनी

स्वतः संज्ञान याचिका की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की बेंच ने राज्य सरकार के वकील से स्पष्ट कहा कि अब प्रशासन की विफलता सामने आ रही है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि ऐसे मामलों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो संबंधित व्यक्तियों को पक्षकार बनाकर अदालत की अवमानना या आदेशों के उल्लंघन का मुकदमा चलाना पड़ सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की गतिविधियां कानून व्यवस्था को खुली चुनौती हैं। कुछ लोग इसे केवल मामूली जुर्माना भरकर खत्म होने वाली कार्रवाई समझ लेते हैं, जबकि यह प्रवृत्ति सामाजिक अनुशासन और सार्वजनिक व्यवस्था दोनों के लिए खतरा बनती जा रही है।

अदालत की सख्त चेतावनी के मायने

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों का इस तरह दुरुपयोग अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि प्रशासन प्रभावी रोक नहीं लगाता है तो न्यायालय स्वयं कठोर कदम उठाने पर विचार कर सकता है।