डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ में प्रस्तावित 55 करोड़ रुपये की परिक्रमा पथ परियोजना अब विकास से ज्यादा विवाद का विषय बनती जा रही है। भूमि अधिग्रहण, सरकारी धन के उपयोग और परियोजना की आवश्यकता को लेकर पहले किसानों ने सवाल उठाए थे, अब कांग्रेस भी खुलकर विरोध में उतर आई है। पार्टी ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इस परियोजना को तत्काल रद्द करने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
किसानों के विरोध से शुरू हुआ पूरा विवाद
परिक्रमा पथ परियोजना के खिलाफ सबसे पहले प्रभावित किसानों ने आवाज उठाई। ग्राम छिरपानी सहित आसपास के गांवों के किसानों का आरोप है कि उनकी कृषि भूमि का अधिग्रहण बिना पर्याप्त संवाद और संतोषजनक प्रक्रिया के किया जा रहा है। उनका कहना है कि जब पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध है, तब निजी खेती की जमीन लेने का कोई औचित्य नहीं बनता।
किसानों ने पहले जिला प्रशासन के समक्ष आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन समाधान नहीं मिलने पर मामला संभाग आयुक्त तक पहुंचा। उनका कहना है कि प्रशासन ने वैकल्पिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार नहीं किया।
कांग्रेस ने सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल
मामले में कांग्रेस ने भी सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि डोंगरगढ़ शहर लंबे समय से बाईपास सड़क की मांग करता आ रहा है, क्योंकि शहर के भीतर से गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जनता की मूलभूत जरूरतों को नजरअंदाज कर करोड़ों रुपये ऐसी परियोजना पर खर्च किए जा रहे हैं, जिसकी उपयोगिता पर ही सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि जिन धार्मिक स्थलों को जोड़ने की बात कही जा रही है, वे पहले से ही सड़क मार्ग से जुड़े हुए हैं।
प्रशासन ने परियोजना को बताया विकास की दिशा में बड़ा कदम
विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने भी अपना पक्ष रखा है। प्रशासन का दावा है कि परिक्रमा पथ बनने से डोंगरगढ़ को धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी।
हालांकि विरोध कर रहे पक्ष का कहना है कि यदि परियोजना वास्तव में जनहित में है, तो उसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), अंतिम रूट मैप, भूमि चयन के मानदंड और वैकल्पिक विकल्पों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम, आंदोलन की तैयारी
मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने मांग की है कि परिक्रमा पथ योजना को निरस्त कर डोंगरगढ़ बाईपास निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही शहर में भारी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।
पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 30 जून को चक्काजाम सहित व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित
पूरे विवाद के केंद्र में एक ही प्रश्न बना हुआ है कि जब डोंगरगढ़ की वर्षों पुरानी मांग बाईपास सड़क है, तब प्रशासन की प्राथमिकता परिक्रमा पथ परियोजना क्यों बनी? जब तक सरकार इस प्रश्न का तकनीकी, आर्थिक और प्रशासनिक आधार पर स्पष्ट जवाब नहीं देती, तब तक 55 करोड़ रुपये की यह परियोजना विवादों में घिरी रहने की संभावना है।
किसानों की आपत्तियां, संभाग आयुक्त तक पहुंची शिकायतें, कांग्रेस का खुला विरोध और आंदोलन की चेतावनी इस मुद्दे को अब केवल एक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं रहने दे रही हैं। यह मामला विकास की प्राथमिकताओं, पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर व्यापक बहस का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई ही तय करेगी कि विवाद समाप्त होगा या यह बड़ा जन आंदोलन बन जाएगा।